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पथ कठोर परिश्रम का – Poem by Lovepreet Balachaur

Written by admin

 

पथ कठोर परिश्रम का

Lovepreet Singh aka Lovepreet Singh or Lovepreet Goondi has written this poem. He has written many poems in English, Hindi and Punjabi. This is a Hindi poem and there are many other which are yet to be published. We seek a very positive and affirmative response to encourage young poets like him even more.

 

गुलाल नहीं ये खून है 

कंटक नहीं प्रसून है ।

जो अश्व सा दौढ़ा रहा 

नित्य अग्रणी बढ़ा रहा 

ये है भाव कर्मनिष्ट

न ये कोई जुनून है ।

गुलाल नहीं ये खून है ।

कंटक नहीं प्रसून है ।





हौसले को हराऊँ मैं ?

द्रडता को डराऊँ मैं ?

जो सूर्य सा तपा रहा 

जो अग्नि सा जला रहा ।

संग संघर्ष का सुकून है !

गुलाल नहीं ये खून है ।

कंटक नहीं प्रसून है ।




एक ओर सुविधा क्षेत्र है ।

लक्ष ताने हुए भी नेत्र हैं ।

जो संकट को सुलभ बना रहा

नीर जैसे जो बहा रहा ।

ये है न कोई संयोग

न ही प्रवंचकों का हुजूम है ।

गुलाल नहीं ये खून है ।

कंटक नहीं प्रसून है ।

 

Hindi to English Translation  : –

गुलाल नहीं ये खून है ।

कंटक नहीं प्रसून है ।

जो अश्व सा दौढ़ा रहा

नित्य अग्रणी बढ़ा रहा

ये है भाव कर्मनिष्ट !

 न ये कोई जुनून है ।

गुलाल नहीं ये खून है ।

कंटक नहीं प्रसून है ।

Translation – Our efforts which expend blood cannot merely be considered as the ones which expend Gualala(Reddish powder). If success is a tree, then our working is like a flower and not the thorns. What makes us run ahead like a horse and with consistent energy is our hard-working attitude and not the madness.

Hard work quote

 

हौसले को हराऊँ मैं?

द्रडता को डराऊँ मैं?

जो सूर्य सा तपा रहा

जो अग्नि सा जला रहा ।

संग संघर्ष का सुकून है!

गुलाल नहीं ये खून है ।

कंटक नहीं प्रसून है ।

Translation –  Why should I make lose my morale? Why should I frighten my rigidity? What makes me heat like the sun and burn like fire is my being with strive! 

Hard work quote

 

एक ओर सुविधा क्षेत्र है ।

लक्ष ताने हुए भी नेत्र हैं ।

जो संकट को सुलभ बना रहा

नीर जैसे जो बहा रहा ।

ये है न कोई संयोग
न ही प्रवंचकों का हुजूम है ।
गुलाल नहीं ये खून है ।

कंटक नहीं प्रसून है ।

TranslationThere are comfort zones on one side but the targets and aims of the life tend me to move out of the comfort zones. And it is rightly said, “Great things never came from Comfort Zones!”. What makes the strenuous and arduous errands turn into the easy ones is our consistent efforts and not the luck or cheat. It’s our efforts which decide and make our destiny..

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